सटीकता एवं तथ्य-जांच
प्रत्येक समाचार को प्रकाशित करने से पूर्व विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक बयानों और साक्ष्यों के आधार पर प्रमाणित किया जाता है। अपुष्ट अफवाहों अथवा वायरल संदेशों को बिना जांच के प्रकाशित नहीं किया जाता।
- प्रत्येक तथ्य को कम से कम दो स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित किया जाता है
- आधिकारिक आंकड़े केवल सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थाओं से लिए जाते हैं
- वायरल दावों की जांच के लिए रिवर्स इमेज सर्च और मेटाडेटा विश्लेषण का उपयोग किया जाता है
- संदिग्ध सूचना को "अपुष्ट" या "दावा" के रूप में स्पष्ट चिह्नित किया जाता है
निष्पक्षता और संतुलन
हम सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। समाचार रिपोर्टिंग में व्यक्तिगत या राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त दृष्टिकोण बनाए रखा जाता है।
- विवादित विषयों पर सभी संबंधित पक्षों का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाता है
- समाचार और संपादकीय टिप्पणी को स्पष्ट रूप से अलग रखा जाता है
- शीर्षक सनसनीखेज़ नहीं, बल्कि तथ्यपरक और सटीक रखे जाते हैं
- चुनावी रिपोर्टिंग में सभी प्रमुख उम्मीदवारों को समान कवरेज दिया जाता है
स्रोत सुरक्षा एवं पारदर्शिता
समाचार स्रोतों की गोपनीयता का सम्मान करना हमारी प्राथमिकता है। गुमनाम स्रोतों का उपयोग केवल तभी किया जाता है जब सार्वजनिक हित में आवश्यक हो और स्रोत की सुरक्षा दांव पर हो।
- गुमनाम स्रोतों का उपयोग केवल वरिष्ठ संपादक की स्वीकृति से होता है
- जब भी संभव हो, स्रोत का नाम और पदनाम प्रकाशित किया जाता है
- व्हिसलब्लोअर की पहचान सुरक्षित रखी जाती है
सुधार नीति
यदि किसी रिपोर्ट में तथ्यात्मक त्रुटि पाई जाती है, तो उसे त्वरित रूप से संशोधित किया जाता है और पाठकों की स्पष्टता हेतु सुधार नोट प्रकाशित किया जाता है।
- छोटी त्रुटियां (वर्तनी, तिथि) तुरंत सुधारी जाती हैं और लेख में "अपडेटेड" चिह्न लगाया जाता है
- महत्वपूर्ण तथ्यात्मक त्रुटि पर लेख के शीर्ष पर "सुधार नोट" प्रकाशित किया जाता है
- गंभीर मामलों में लेख वापस लिया जा सकता है, जिसकी सूचना पाठकों को दी जाती है
- पाठक editorial@thelocalleader.in पर त्रुटि की सूचना दे सकते हैं
विज्ञापन और समाचार का पृथक्करण
प्रायोजित लेखों अथवा विज्ञापनों को स्पष्ट रूप से “विज्ञापन” अथवा “प्रायोजित” लेबल द्वारा चिह्नित किया जाता है ताकि पाठक समाचार और विज्ञापन में अंतर स्पष्ट समझ सकें।
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संवेदनशील विषय एवं भाषा
संवेदनशील विषयों — जैसे जातीय हिंसा, आत्महत्या, यौन अपराध, सांप्रदायिक तनाव — की रिपोर्टिंग में विशेष सावधानी बरती जाती है।
- यौन अपराध पीड़ितों की पहचान कानूनी प्रावधानों के अनुसार गोपनीय रखी जाती है
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- आत्महत्या की रिपोर्टिंग WHO मीडिया दिशानिर्देशों के अनुरूप की जाती है
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- जाति, धर्म, लिंग या क्षेत्र के आधार पर भेदभावपूर्ण भाषा वर्जित है
डिजिटल एवं सोशल मीडिया
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उत्तरदायित्व
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